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Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख

Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख
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Cryptocurrency से इकोनॉमी के डॉलरीकरण का खतरा, RBI अधिकारी ने कही यह बात

डिजिटल मुद्रा आने के बाद क्रिप्टोकरेंसी का मामला ‘समाप्त’ हो जाएगा: आरबीआई डिप्टी गवर्नर

मुंबई, दो जून (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा है कि जल्द पेश की जाने केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) से निजी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन को लेकर जो थोड़ा बहुत भी मामला बनता है, वह ‘समाप्त’ हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर परामर्श पत्र लाने की तैयारी कर रही है।

शंकर ने ‘स्टेबल कॉइन’ Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख पर भी आपत्ति जताई है जिसे एक प्रकार की मुद्रा कहा जाता है।

रिजर्व बैंक बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का पुरजोर विरोध करता रहा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन तरह की ‘करेंसी’ का कोई अंतनिर्हित मूल्य नहीं है, इसकी प्रकृति ‘सट्टेबाजी’ की है। रिजर्व बैंक इस बारे में अपना रुख सार्वजनिक कर चुका है। हालांकि, सरकार ने अभी क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

क्रिप्टो एक्सचेंज की तबाही से भारत में भी भय का माहौल, देश में क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं

नई दिल्ली। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज एफटीएक्स के प्रमुख सैम बैंकमैन-फ्राइड दो दिन पहले तक टेक की दुनिया के सुपरस्टार थे। उन्हें क्रिप्टो का रक्षक, डेमोक्रेटिक राजनीति में नवीनतम शक्ति और संभावित रूप से दुनिया के पहले खरबपति जैसे विशेषणों से नवाजा जाता था, लेकिन आज वह क्रिप्टो जगत के सबसे बड़े खलनायक हैं। 30 वर्षीय बैंकमैन-फ्राइड द्वारा चलाया जा रहा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज शुक्रवार को दिवालिया हो गया और निवेशकों और ग्राहकों ने खुद को ठगा महसूस किया। अगर आप भी क्रिप्टो में निवेश के बारे में सोच रहे हैं तो अच्छी तरह से जान लें कि आप एक ऐसी अंधी Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख गली में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें कब क्या हो जाए किसी को नहीं मालूम।

भारतीयों के लिए क्या हैं मायने
गुरुग्राम के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर ब्रजेश शर्मा ने पांच साल पहले क्रिप्टोकरेंसी में दो लाख रुपये का निवेश किया था। पिछले साल तक वह निवेश से काफी उत्साहित थे, लेकिन अब डर सताने लगा है। ऐसा ही कुछ बंगलूरू में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रितेश कुमार का सोचना है। उनका कहना है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को न तो मान्यता है और न ही क्रिप्टो एक्सचेंज चलाने वाली कंपनियां अपने बारे में कुछ खुलकर बताती हैं। ऐसे में अगर पैसा डूबा तो हम कोई दरवाजा भी नहीं खटखटा सकते हैं।

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हालात और बुरे होने की आशंका

  • जानकारों के अनुसार, पहले से मंदे बाजार को अब इस नई अनिश्चितता से निपटना होगा।
  • एफटीएक्स के ढहने के बाद मार्केट में नकदी का संकट पैदा हो सकता है, जिसका खामियाजा दूसरी क्रिप्टोकरेंसी को भुगतना पड़ेगा।
  • भारत के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वजीरएक्स के उपाध्यक्ष राजगोपाल मेनन को डर है कि सबसे बुरा अभी खत्म नहीं हुआ है और कुछ भी हो सकता Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख है। उन्होंने कहा कि पहले से मंदे बाजार को इस नई अनिश्चितता से निपटना होगा।

सरकार और आरबीआई की सर्तकता से बचे निवेशक Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख
दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के अरबों डॉलर डूब गए। हालांकि, सरकार और आरबीआई के सतर्क रुख से भारतीय निवेशकों पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। आरबीआई क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से बार-बार इनकार करता रहा है। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर चेतावनी भी दी है। इसके अलावा, सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर 30 फीसदी का भारी-भरकम टैक्स और लेनदेन पर एक फीसदी का अतिरिक्त टीडीएस भी लगाया है। आंकड़ों के Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख मुताबिक, वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार का पूंजीकरण 2021 में 3 लाख Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख करोड़ डॉलर (234.7 लाख करोड़ रुपये) था। एक साल में ही इसका कुल बाजार मूल्य 2 लाख करोड़ डॉलर (165 लाख करोड़ रुपये) घटकर अब एक लाख करोड़ डॉलर (81.23 लाख करोड़ रुपये) रह गया है।

RBI On Cryptocurrency: डिजिटल मुद्रा आने के बाद खत्म हो जाएगी क्रिप्टोकरेंसी? डिप्टी गवर्नर ने कही यह बात

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RBI On Cryptocurrency: भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर टी रवि शंकर ने कहा है कि जल्द पेश की जाने केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) से निजी डिजिटल मुद्रा बिटकॉइन को लेकर जो थोड़ा बहुत भी मामला बनता है, वह समाप्त हो जाएगा. उल्लेखनीय है कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर परामर्श पत्र लाने की तैयारी कर रही है.

शंकर ने स्टेबल कॉइन पर भी आपत्ति जतायी है जिसे एक प्रकार की मुद्रा कहा जाता है. रिजर्व बैंक बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी का पुरजोर विरोध करता रहा Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन तरह की करेंसी का कोई अंतनिर्हित मूल्य नहीं है, इसकी प्रकृति सट्टेबाजी की है.

Cryptocurrency रिजर्व बैंक ने क्रिप्टो करेंसी को लेकर अपनी चिंताओं से Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख सरकार को अवगत कराया है: दास

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File Photo

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय बैंक (Central Bank) को बाजार में क्रिप्टो करेंसी (cryptocurrency) के कारोबार को लेकर चिंताएं हैं और उसने इस बारे में सरकार को अवगत कराया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच कोई मतभेद नहीं है तथा दोनों वित्तीय स्थिरता को लेकर प्रतिबद्ध हैं। “हमें इस बारे में केंद्र की तरफ से अंतिम निर्णय का इंतजार करना चाहिए।”

क्रिप्टो करेंसी के लेकर Cryptocurrency को लेकर क्या है केंद्र सरकार का रुख सरकार की तरफ से कुछ भ्रम पैदा करने वाले संकेत आने के बीच दास ने यह बात कही है। इस प्रकार की मुद्राओं में काफी उतार-चढ़ाव को देखते हुए इसे पूर्ण रूप से प्रतिबंधित करने का इरादा जताने के बाद, सरकार ने बिट कॉइन जैसी मुद्राओं को लेकर कुछ नरम रुख दिखाया है। टाइम्स नेटवर्क इंडिया एकोनॉमिक कॉनक्लेव में दास ने कहा कि आरबीआई ने क्रिप्टो करेंसी को लेकर अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत करा दिया है।

3 साल पहले मुकेश अंबानी लेकर आने वाले थे जियो क्‍वाइन, क्‍यों रोकना पड़ा अपना प्रोजेक्‍ट?

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सिर्फ भारत ही नहीं, विदेशों में भी मुकेश अंबानी के कई फेमस दोस्त हैं

कुछ दिन पहले खबर आई थी कि एल सल्‍वाडोर ने बिटक्‍वाइन को लीगल टेंडर घोषित कर दिया है। उसके बाद एलन मस्‍क ने ट्वीट कर कहा कि टेस्‍ला की गाड़ी खरीदने के लिए बिटक्‍वाइन का इस्‍तेमानल किया जा सकता है। जिसके बाद से बिटक्‍वाइन की कीमत 41 हजार डॉलर को क्रॉस कर गया। अगर बात भारत की करें तो भारत में क्रि‍प्‍टो करेंसी में निवेश तो गैरकानूनी नहीं है , लेकिन सरकार ने इसे अभी तक मान्‍यता नहीं दी है। खास बात तो ये है कि देश के सबसे अमीर शख्‍स मुकेश अंबानी तो जियो क्‍वाइन को लांच करने की तैयारी तक कर डाली थी , लेकिन क्रि‍प्‍टोकरेंसी को लेकर केंद्र रुख के बाद मुकेश अंबानी को अपने फैसले को रोकना पड़ा।

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