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मुद्रा व्यापार की मूल बातें

मुद्रा व्यापार की मूल बातें

मुद्रा का महत्व | Importantance of Money

मुद्रा मनुष्य के समस्त आविष्कारों में एक आधारभूत अविष्कार हैं। ज्ञान की प्रत्येक शाखा के अपने मूल अविष्कार हैं। मशीनों में यह अविष्कार पहिया हैं, विज्ञान में आग है और राजनीति विज्ञान में वोट (Vote) है उसी प्रकार अर्थशास्त्र तथा मनुष्य के समस्त व्यापारिक जीवन में मुद्रा एक ऐसा मूलभूत अविष्कार है जिस पर अन्य सभी बातें आधारित होते हैं।

आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा का महत्व

आज के समय में इस समय में अर्थव्यवस्था में मुद्रा का महत्व निम्नलिखित रूपों में है

साख का निर्माण

साख अर्थात् भरोसा । मुद्रा के लोगों के बीच, लोगों में साख बन जाता है जिससे कोई भी कार्य के लिए विनिमय में कोई परेशानी नहीं होता हैं। आज के समय में संपूर्ण व्यवसाय साठ पर ही आधारित है जितने भी बैंकिंग संस्थाएं हैं उद्योग एवं व्यापार को पैसे उधार देकर उनको आगे की ओर बढ़ने में सहायता करते हैं। साख की वर्तमान तथा भविष्य की मात्रा की श्रेष्ठतम माप मुद्रा में ही हो सकती हैं। मुद्रा के बिना साख-व्यवस्था का अंत हो जाएगा। अतः मुद्रा वर्तमान अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक तेल तथा ईंधन का कार्य करते हैं।

सामाजिक क्षेत्र में क्रांति

आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा का यह दूसरा सबसे बड़ा महत्व हैं इसके माध्यम से ही संपत्ति का विनियोग (Investment) किया जाता हैं। अनेक स्कूल, कालेज, होटल, लाइब्रेरी इत्यादि पैसे से ही चलाए जा रहे हैं।

आधुनिक बाजार व्यवस्था का आधार

यह (Money) ही एक ऐसा माध्यम है जिसके कारण बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्था स्थापित हुई है क्योंकि बड़े कारखानों में जितने माल का उत्पादन होता हैं, वह सभी मुद्रा के बदले तत्काल बिक जाता हैं और प्राप्त हुए मुद्रा से दोबारा कच्चा माल खरीदा जाता हैं।

उससे नया माल बनाया जाता हैं। इस प्रकार मुद्रा के माध्यम से पूंजी का कई बार आवर्तन (Turnover) किया जा सकता है और अधिक लाभ कमाया जा सकता हैं।

राजनीतिक क्षेत्र में क्रांति

समय जैसे-जैसे बदलता गया, वैसे-वैसे विनिमय का माध्यम भी बदलता गया । Money ने पूरा काया ही पलट दिया । इसने राजनीतिक क्षेत्र में क्रांति ही ला दी। जनता सरकार को टैक्स चुकाता हैं,Tax पहले भी देता था अपनी इच्छा के बिना लेकिन आज जनता अपनी इच्छा से सरकार को Tax Pay करता है और इसके बदले में उसे कुछ अधिकार भी प्राप्त होते हैं।

सामाजिक कल्याण की सूचक

मुद्रा के माध्यम से ही किसी देश की राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय का माप होता हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति की वास्तिवक आय बढ़ती रहती है तो देश आर्थिक कल्याण की ओर आगे बढ़ता हैं, अन्यथा नहीं बढ़ता है।

अर्थशास्त्र के विभिन्न क्षेत्रों में मुद्रा का महत्व

उत्पादन क्षेत्र

आधुनिक युग में उत्पादन अनेक तत्वों के सहयोग का परिणाम है जिनमें भूमि, श्रम, पूंजी, संगठन एवं साहस का समावेश होता हैं। इन सभी तत्वों के मूल्य का सामूहिक योग लागत होती है जो मुद्रा में निर्धारित की जाती हैं।

विनिमय क्षेत्र

जब किसी भी माल को तैयार कर लिया जाता है तो उसे बेचने की बारी आती है। मुद्रा प्रत्येक वस्तु की लागत का अनुमान लगाने में सहायक होती हैं और लागत के आधार पर ही वस्तु का मूल्य निर्धारित किया जाता हैं। मूल्य निश्चित किए बिना किसी भी वस्तु की बिक्री संभव नहीं हैं।

वास्तव में, संपूर्ण विक्रय-व्यवस्था मुद्रा पर ही आधारित हैं। मुद्रा विनिमय का माध्यम और मूल्यमापक का कार्य करती हैं। इस प्रकार मुद्रा ने वस्तु विनिमय की कठिनाइयों को दूर कर दिया हैं।

उपभोग क्षेत्र

आर्थिक क्रियाओं में उपभोग का सबसे पहला स्थान हैं। मनुष्य जिस वस्तु का उपभोग करना चाहता हैं, उसकी खरीद की मात्रा वस्तु की कीमत पर निर्भर करती हैं और कीमत के निर्धारण में मुद्रा की महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं। उपभोग का उद्देश्य अधिकतम संतोष प्राप्त करना होता हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपनी सीमित आय को इस प्रकार व्यय करना चाहता है कि उसे अधिकतम संतोष प्राप्त हो सके ।

यह मुद्रा द्वारा ही संभव है क्योंकि मुद्रा द्वारा ही यह जाना जा सकता है कि किस वस्तु के उपभोग से कितना संतोष प्राप्त हो सकेगा।

Expert Column समाचार

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही या सितंबर तिमाही में सभी बैंकों ने शुद्ध लाभ और फंसे कर्ज (एनपीए) के पैमानों पर शानदार प्रदर्शन किया है। बैंकों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसके जरिये ही अर्थव्यवस्था को गतिशील और मजबूत .

बीते करीब छह महीने से भारतीय बाजारों का व्यवहार वैश्विक बाजारों से अलग रहा है। खासतौर पर अमेरिकी बाजारों की तुलना में। अमेरिकी बाजारों से तुलना इसलिए भी सही हैं क्योंकि हमारे ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय फंड्स अमेरिका पर फोकस करते .

हाल में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भारतीय मुद्रा यानी रुपये में करने के लिए सरकार ने विदेश व्यापार नीति में बदलाव किया है। अब सभी तरह के पेमेंट बिलिंग और आयात-निर्यात में लेन-देन का निपटारा रुपये में हो सकता है। रुपये के अंत.

पिछली सदी के अंतिम दशक तक विश्व मुद्रा व्यापार की मूल बातें व्यवस्था की दिशा और दशा को तय करने में रक्षा और विदेश नीति की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। परंतु धीरे-धीरे यह परिदृश्य बदलता गया और इसमें आर्थिकी का योगदान भी महत्वपूर्ण होता गया।

अगर आप एक मोबाइल फोन खरीदना चाहते हैं या एक जोड़ी जूते लेना चाहते हैं या एक कार तो अपना फोन निकालिए और आपको उसका सही-सही खर्च तुरंत पता चल जाएगा। मगर यही चीज आप अस्पताल के एपिसोड के साथ नहीं कर सकते।

Mutual Fund में SIP या दूसरे तरीकों से निवेश का मतलब यही है कि बुरे वक्त में निवेश जारी रखा जा सके। स्मार्ट इन्वेस्टर इस बात का अनुमान नहीं लगाते कि मार्केट किस दिशा में जा रहे हैं। वो निवेश का सही जरिया तलाश लेते हैं।

Investment and Saving किसी ने एक बार कहा था कि निराशावादी स्मार्ट लगते हैं और आशावादी पैसे बनाते हैं। क्या आप जानते हैं कि निराशावादी स्मार्ट क्यों लगते हैं क्योंकि उनकी बातें तथ्यों रुझानों आंकड़ों अनुमानों से लदी-फंदी होती .

सीआइसी के अनुसार देश के शहरी क्षेत्रों में ईएमआइ चुकाने वाले आमतौर पर 18 से 35 साल के नौजवान हैं। इन नौजवानों का देश की आर्थिकी को आगे बढ़ाने में व्यापक योगदान है। ऐसे में इन लोगों द्वारा लिए गए लोन पर मासिक किस्तों को बढ़ाते.

आर्थिक विकास में बैंकों का व्यापक योगदान एक बार फिर सामने आया है। परंतु भारत में बैंकों में पांच लाख रुपये तक की जमा राशि ही सरकार द्वारा गारंटीड होती है इससे अधिक रकम का सुरक्षा कवच नहीं है।

Stock Market Investment: क्या कहानियों पर भरोसा करके निवेश करते हैं आप? समझ लें वैल्यू इन्वेस्टिंग के कायदे

एक निवेश के चुनाव का पूरा आकलन और विश्लेषण होने के बाद आपको ये सोचना ही होगा कि जो लागत आप अदा कर रहे हैं वो आगे जा कर मुनाफे में बदलेगी या नहीं। निवेश के दाम पर ही फोकस बनाए रखना वैल्यू इन्वेस्टिंग है।

विश्व आर्थिक मंच के अनुसार दुनिया में लगभग 100 देशों में सरकारी नियंत्रण वाली डिजिटल करेंसी लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चीन ने 2023 में ऐसा करने की घोषणा कर रखी है। यूरोप के 27 देशों में डिजिटल करेंसी लाने की योजना पर .

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के अनुसार देश में जल्द ही ई-रुपया लांच किया जा सकता है। ई-रुपी की चर्चा ने इस बीच तब जोर पकड़ा जब भारतीय रिजर्व बैंक ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह डिजिटल रुपये के निर्माण-संचालन में ब्लाकचेन.

विडंबना है कि अमीर की आय ज्यादा तेजी से बढ़ रही है और गरीब की आय तुलनात्मक रूप से कम तेजी से बढ़ रही है? इनका जवाब है पब्लिक पालिसी अर्थात लोक नीतियों का खामियों से युक्त होना।

पिछले कुछ समय से अमेरिकी डालर की तुलना में रुपये की कीमत गिरती जा रही है। वैसे इस गिरावट को रोकने के लिए आरबीआइ द्वारा हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। कई संबंधित कारणों से हाल के दिनों में लोगों की क्रय शक्ति कम हुई है।

ऐसे इन्वेस्टर जो मार्केट की स्थितियों को नजरअंदाज कर रिस्क वाली शैली ही हमेशा अपनाए रहते हैं वो शायद ही कभी अच्छा कर पाते हैं। अगर आप तब तक इंतजार करते हैं जब उनकी जरूरत होगी तब बहुत देर हो जाएगी।

आपका वित्तीय सलाहकार उस डाक्टर की तरह होता है जो कई टेस्ट और स्कैन करता है और ऐसी कई बीमारियां ढूंढ-ढूंढ के निकाल देता है जिन्हें अच्छे-खासे इलाज की जरूरत होती है। आपको ऐसा वित्तीय सलाहकार नहीं मिलेगा जो आपसे कहे कि आपके निवे.

RBI News आपको अपने कार्ड के डिटेल की जगह यूनिक कोड सेव करना होगा। एक तरह से देखा जाए तो कार्ड टोकनाइजेशन पासवर्ड मैनेजर की तरह का कार्य करेगा जो आनलाइन लेन-देन के दौरान यूनिक कोड जेनरेट करेगा।

एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ अमिताभ चौधरी ने बैंकिंग सेक्टर के समक्ष नई तकनीक से पैदा होने वाली चुनौतियों ब्याज दरों की स्थिति और आर्थिक विकास के भावी स्वरूप पर दैनिक जागरण के विशेष संवाददाता जयप्रकाश रंजन से विस्तार में बात क.

शेयर बाजार में नुकसानदायक है 'महंगा खरीदो और सस्ता बेचो' की रणनीति, मुनाफा चाहिए तो हरगिज न करें ये गलतियां

जब आप किसी बिजनेस को ऊंचे मुनाफे के साथ खत्म करते हैं तो सफलता का अहसास बड़ा लुभावना होता है। एक बड़ी जीत की तरह। इस रवैये का एक शैतान जुड़वां भाई भी है और वो है पिटे हुए निवेश को ढोते रहना।

रूस ने भारत, अन्य साझेदारों के साथ व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाने का संकेत दिया

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शुक्रवार को कहा कि रूस ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए भारत और अपने अन्य साझेदारों के साथ राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने की दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर दिया है। साथ ही, उन्होंने भारत को तेल, सैन्य साजो सामान और अन्य वस्तुओं की जरूरतों को भी पूरा करने का वादा किया। लावरोव ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत के बाद यह टिप्पणी की। उनकी बैठक में यूक्रेन संकट के भारत-रूस संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव

साथ ही, उन्होंने भारत को तेल, सैन्य साजो सामान और अन्य वस्तुओं की जरूरतों को भी पूरा करने का वादा किया।

लावरोव ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत के बाद यह टिप्पणी की। उनकी बैठक में यूक्रेन संकट के भारत-रूस संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव और दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रक्षा सहित विविध क्षेत्रों में सहयोग जारी रखने के तरीके पर भी बातचीत हुई।

अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दलीप सिंह ने बुधवार को कहा था कि वाशिंगटन रूस से भारत के ऊर्जा और अन्य वस्तुओं के आयात में ‘‘तेजी’’ नहीं देखना चाहेगा।

रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों को "विफल करने" के प्रयासों के परिणाम भुगतने की अमेरिका द्वारा चेतावनी दिए जाने के एक दिन बाद यह वार्ता हुई है।

पत्रकारों के एक चुनिंदा समूह के साथ ब्रीफिंग में यह पूछे जाने पर कि क्या रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष को कम करने में भारत मदद कर सकता है, लावरोव ने कहा कि अगर भारत अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के प्रति अपने "न्यायसंगत और तर्कसंगत दृष्टिकोण" के साथ ऐसी प्रक्रिया का समर्थन करना चाहता है, तो कोई भी इसके खिलाफ नहीं होगा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत से इस बारे में कुछ नहीं सुना है।

इस सवाल पर कि क्या बातचीत में रूबल-रुपया भुगतान प्रणाली पर चर्चा की गई, लावरोव ने कहा कि भारत और चीन जैसे देशों के साथ व्यापार के लिए ऐसी व्यवस्था कई साल पहले शुरू की गई थी और पश्चिमी (डॉलर और यूरो में) भुगतान प्रणालियों को दरकिनार करने के प्रयास अब तेज किए जाएंगे।

लावरोव ने कहा, "मुझे याद है कि कई साल पहले हमने भारत, चीन (और) कई अन्य देशों के साथ अपने संबंधों में डॉलर और यूरो के उपयोग को कम करते हुए राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक से अधिक उपयोग की ओर बढ़ना शुरू किया था। वर्तमान परिस्थितियों में, मुझे विश्वास है कि यह प्रवृत्ति तेज होगी जो स्वाभाविक और स्पष्ट है।"

उन्होंने कहा, "हम ऐसी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहते जो कभी भी बंद हो जाए और हम ऐसी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहते जिसके मालिक रातों-रात आपका पैसा चुरा लें।"

विदेश मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक भारत और रूस ने मॉस्को पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद द्विपक्षीय आर्थिक, तकनीकी और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को “स्थिर और विश्वसनीय” रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “मंत्रियों ने सहयोग की समग्र स्थिति का आकलन किया। उन्होंने व्यापार और आर्थिक संबंधों पर हाल के घटनाक्रमों के प्रभावों पर विचार किया।”

इसमें कहा गया है कि जयशंकर ने रेखांकित किया कि एक विकासशील अर्थव्यवस्था के रूप में, विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक अस्थिरता भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है।

रूसी विदेश मंत्री ने पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए भारत और रूस के संबंधित मंत्रालयों के बीच "बहुत अच्छे संबंधों" के बारे में बात की।

उन्होंने कहा, "हमारे व्यापार मंत्रालयों, वित्त मंत्रालयों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं, और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि पश्चिम द्वारा उत्पन्न किए जाने वाले अवैध और एकतरफा प्रतिबंधों जैसी कृत्रिम बाधाओं को दूर करने के लिए एक रास्ता खोजा जाएगा।"

उन्होंने कहा, "यह सैन्य-तकनीकी सहयोग के क्षेत्र से भी संबंधित है। हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि समाधान मिल जाएगा और संबंधित मंत्रालय इस पर काम कर रहे हैं।"

यह पूछे जाने पर कि क्या रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद के लिए भारत की इच्छा पर चर्चा की गई, लावरोव ने कहा, "मुद्रा व्यापार की मूल बातें हम भारत को किसी भी वस्तु की आपूर्ति करने के लिए तैयार होंगे, जो भारत खरीदना चाहता है।"

रूसी विदेश मंत्री ने यूक्रेन संकट पर भारत की स्थिति की भी सराहना की और कहा कि अधिकतर देश समझते हैं कि क्या हो रहा है और संकट का मूल कारण क्या है।

उन्होंने कहा, "पश्चिमी सहयोगियों ने इन दिनों अपना असली चेहरा उजागर किया है और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि अधिकतर देश समझ रहे हैं कि क्या हो रहा है।"

लावरोव ने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद रूस, भारत के साथ व्यापार के प्रवाह को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों पर निर्णय लेना हमारे लिए एक स्वाभाविक मार्ग है। इस तरह की अनुचित प्रतिक्रिया के संदर्भ में, हमें इस दिशा में निष्पक्ष और स्वाभाविक रूप से काम करना होगा, व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में काम करना होगा।’’

लावरोव कहा, "यह कोई कल की बात नहीं है, बल्कि कई साल से हम पश्चिमी प्रतिबंधों से निपट रहे हैं और हमें इन परिस्थितियों में जीने का अनुभव है तथा हम ठीक हैं और हमारे साथी भी इसमें ठीक हैं।"

लावरोव ने कहा कि वार्ता कई दशकों में भारत के साथ विकसित संबंधों से प्रेरित है और दोनों पक्षों के बीच विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है।

उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्रता और वास्तविक राष्ट्रीय वैध हितों पर ध्यान केंद्रित करने से प्रेरित है।"

लावरोव ने कहा कि रूस क्षेत्र के देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और दक्षिण एशिया में पारस्परिक रूप से लाभकारी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों का समर्थन करता है।

जयशंकर से बातचीत के बाद लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक बयान के अनुसार रूस के विदेश मंत्री ने मोदी को यूक्रेन की स्थिति समेत मॉस्को की कीव के साथ जारी शांति वार्ता के बारे में जानकारी दी।

बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री ने हिंसा की शीघ्र समाप्ति के लिए अपने आह्वान को दोहराया और शांति प्रयासों में किसी भी तरह से योगदान करने के लिए भारत के तैयार रहने से अवगत कराया।’’

कई अन्य प्रमुख देशों के विपरीत, भारत ने अभी तक यूक्रेन पर आक्रमण को लेकर रूस की आलोचना नहीं की है और उसने संयुक्त राष्ट्र में रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों पर मतदान से दूरी बना ली है।

FX Academy

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FX Academy एक व्यापक शैक्षिक प्रणाली है जो व्यापारियों के लिए एक सहज, इंटरैक्टिव वातावरण में अपनी गति से विदेशी मुद्रा व्यापार के बारे में जानने की आवश्यकता से सीधे कल्पना की जाती है। DailyForex.com पर ट्रेडिंग विशेषज्ञों द्वारा स्थापित किया गया है जो 2006 से विदेशी मुद्रा बाजार पर निगरानी और रिपोर्टिंग कर रहे हैं, FX Academy उन सभी स्तरों के व्यापारियों को पेश करती है जिन्हें उन्हें अपने व्यापारिक कौशल को तेज करने और विदेशी मुद्रा की दुनिया के अपने ज्ञान को बढ़ाने की आवश्यकता होती है।

विशिष्ट तकनीकी ट्रेडिंग रणनीतियों मुद्रा व्यापार की मूल बातें और विदेशी मुद्रा व्यापार की मूल बातें के बारे में पाठ्यक्रमों के अलावा, FX Academy व्यापारिक मनोविज्ञान की जटिलताओं से निपटने के लिए कई प्रकार के पाठ भी प्रदान करती है, जो व्यापारियों को उनकी ताकत, उनकी कमजोरियों और खुद को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाती हैं। FX Academy एक पूरी तरह से निशुल्क सेवा है जिसे इस समझ के साथ बनाया गया था कि विदेशी मुद्रा व्यापार को सहयोगी अनुसंधान और स्वतंत्र सोच के मिश्रण की आवश्यकता होती है, और यह कि प्रत्येक व्यापारी को उस रणनीति को खोजना होगा जिसके साथ वह सबसे अधिक आरामदायक है।

आज तक, FX Academy ने पाठ्यक्रमों की एक श्रृंखला प्रदान की है, जिसमें वीडियो, क्विज़ और ट्रेड सिमुलेटर के साथ पूरा किया गया है, जिससे व्यापारियों को अपनी परेशानी के स्थानों की पहचान करने और अपने विदेशी मुद्रा व्यापार के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। FX Academy ने अपनी अनूठी विदेशी मुद्रा रणनीति सिमुलेशन विकसित किया है, जो उपयोगकर्ताओं के लिए भविष्य के व्यापार के लिए अपनी व्यापारिक रणनीतियों को परिभाषित करने में सहायता करने के लिए बनाया गया एक मूल्यवान उपकरण है।

अपने अध्ययन के दौरान, व्यापारियों को उनके द्वारा सीखी गई जानकारी पर परीक्षण किया जाएगा ताकि वे देख सकें कि वे कहाँ एक्सेल करते हैं और उन्हें अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता कहाँ है। सबक का निर्माण इस तरह से किया जाता है कि एक छात्र सामग्री में जितना गहरा होता है, वह उतना ही अधिक स्तर तक पहुंच सकता है। प्रत्येक पाठ अतिरिक्त पठन सामग्री और संबंधित पाठ और लेखों के लिंक के साथ है।

इसी तरह, प्रत्येक FX Academy छात्र प्रश्न पूछने और अन्य व्यापारियों और वित्तीय पेशेवरों से उत्तर प्राप्त करने में सक्षम होगा, जिससे कि प्रत्येक विदेशी मुद्रा व्यापार अवधारणा भागीदार के लिए पूरी तरह से समझ में आने वाली और फायदेमंद होगी।

FX Academy एक पायलट प्रोग्राम है और बीटा संस्करण का उपयोग करता है। सभी पंजीकृत सदस्य अतिरिक्त पाठ, विदेशी मुद्रा व्यापार रणनीतियों और हमारे द्वारा प्रासंगिक किसी भी नई शैक्षिक सामग्री की सूचनाएं प्राप्त करेंगे। चूंकि FX Academy किसी भी ब्रोकरेज के स्वामित्व में नहीं है, हमारे उपयोगकर्ता सामग्री की समीक्षा करने में सक्षम हैं, जब तक कि वे 100% अपने आप से व्यापार शुरू करने के लिए तैयार महसूस न करें।

FX Academy , हमारा लक्ष्य सभी स्तरों पर व्यापारियों की मदद करने के लिए उनके आत्मविश्वास, बाजार की उनकी समझ और लाभप्रद रूप से व्यापार करने की उनकी क्षमता को बढ़ाने में मदद करना है। हमने एक विशेष कार्यक्रम बनाया है, जो हमें उम्मीद है कि व्यापारियों की अधिकतम संख्या तक पहुंच जाएगा और उन्हें विदेशी मुद्रा क्षेत्र में उपलब्ध सर्वोत्तम स्कॉलैस्टिक सामग्री प्रदान करेगा। हम अपने सदस्यों से प्रतिक्रिया और अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं और विदेशी मुद्रा व्यापार के लिए सर्वश्रेष्ठ समग्र स्थान प्रदान करने के प्रयास में अपने कार्यक्रम को अद्यतन और सुधारना जारी रखेंगे।

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विदेशी मुद्रा के लिए समझदार गाइड के आधार पर

एफएक्सए को क्लिफ वाचटेल द्वारा लिखित सबक, एक अनुभवी पेशेवर व्यापारी और पुरस्कार विजेता पुस्तक "द सेंसिबल गाइड टू फॉरेक्स" के लेखक पर गर्व है।

कानून जानें: अगर विदेशी करेंसी में करते है व्यापार तो रखें बातों का ध्यान

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विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 भारत में विदेशी मुद्रा से संबंधित समेकित कानून है. यह बाहरी व्यापार और भुगतान की सुविधा प्रदान करता है और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित विकास और रखरखाव को बढ़ावा देता है.फेमा का मुख्य उद्देश्‍य देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों का संरक्षण तथा उचित उपयोग करना था. इसका उद्देश्‍य भारतीय कंपनियों द्वारा देश के बाहर तथा भारत में विदेशी कंपनियों द्वारा व्‍यापार के संचालन के कुछ पहलुओं को नियंत्रित करना भी है. यह एक आपराधिक विधान था, जिसका अर्थ था कि इसके उल्‍लंघन के परिणामस्‍वरूप कारावास तथा भारी अर्थ दंड के भुगतान की सजा दी जाएगी.

फेमा कानून को नए रूप में लाने के पीछे मुख्य उद्देश्य विदेशी विनिमय बाजार और व्यापार को और अधिक सरल बनाना है. संवैधानिक रूप से फेमा में लिखित प्रावधान के अनुसार भारत से बाहर रह रहा वो व्यक्ति जो कभी भारत का नागरिक था, वह भारत में अधिग्रहण व अचल संपत्ति में निवेश कर सकता है.

फेमा के कानूनों के बारे में जानना महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि सरकार के वर्तमान मूड और व्यवसाय देश में बहुत से विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को आमंत्रित करते हैं और आपके लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप ऐसे कानूनों को समझें जिनके अंतर्गत ऐसे विदेशी लेनदेन हो सकते हैं या कार्य शुरू किये गए हो.

फेमा की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल हैं:

यह पूर्णरूप से चालू खाते की परिवर्तनीयता के अनुरूप है और इसमें पूंजी खाते के लेन-देन हेतु प्रगतिशील उदारीकरण के प्रावधान हैं.

इसकी आवेदन प्रक्रिया बहुत पारदर्शी है और इसमें विदेशी मुद्रा के अधिग्रहण/ जमाखोरी पर रिजर्व बैंक या भारत सरकार के निर्देश बिलकुल स्पष्ट हैं.

फेमा के तहत विदेशी मुद्रा लेनदेन को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है:

पूंजी खाता
चालू खाता

  1. यह भारत में रहने वाले एक व्यक्ति को पूरी स्वतंत्रता प्रदान करता है कि वह भारत के बाहर संपत्ति को खरीद सकता है मालिक बन सकता है और उसका मालिकाना हक़ भी किसी और को दे सकता है (जब वह विदेश में रहता था)
  2. यह अधिनियम एक सिविल कानून है और अधिनियम के उल्लंघन के मामले में असाधारण मामलों केवल गिरफ्तारी हो सकती है.
  3. फेमा, भारत के बाहर रहने वाले भारतीय नागरिक पर लागू नहीं होती है.

फेमा को विदेशी मुद्रा लेनदेन में आसानी लाने के लिए अधिनियमित किया गया है क्योंकि भारत में विदेशी निवेश के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक हैं.

अधिनियम में निर्दिष्ट विदेशी लेनदेन के लिए आरबीआई से अनुमति की आवश्यकता वाले कुछ लेन-देन में शामिल हैं:

  • किसी ऐसे व्यक्ति के साथ विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूति का लेन देन करना या अंतरित करना जो अधिकृत व्‍यक्ति नहीं है;
  • भारत के बाहर निवासी किसी व्‍यक्ति को या उसके क्रेडिट के लिए किसी भी तरीके से कोई भुगतान करना;
  • चालू खाता लेनदेन पर उनके लिए उचित प्रतिबंध हैं जबकि विदेशी मुद्रा को किसी भी अधिकृत व्यक्ति से पूंजी खाता लेनदेन के लिए बेचा या खरीदा जा सकता है.

आरबीआई द्वारा रखे गए कुछ प्रतिबंधों में शामिल मामले :

भारत के बाहर रहने वाले किसी भी व्यक्ति को किए गए किसी भी विदेशी सुरक्षा को स्थानांतरित करना.

भारत के निवासी होने वाले किसी भी व्यक्ति को किए गए किसी भी विदेशी सुरक्षा को स्थानांतरित करना .

भारत के बाहर रहने वाले व्यक्ति के लिए भारत में किसी भी शाखा, कार्यालय या एजेंसी को किसी भी विदेशी सुरक्षा को स्थानांतरित करना.

अज्ञात नाम के तहत विदेशी मुद्रा उधार लेना और उधार देना.

भारत के बाहर रहने वाला व्यक्ति और भारतीय निवासी के बीच रुपये के मूल्य के तहत उधार लेना और उधार देना.

एक गैर आवासीय भारतीय और एक भारतीय निवासी के बीच जमा के सभी रूप.

मुद्रा या मुद्रा नोट्स का आयात या निर्यात.

आरबीआई के पास भारत में किसी भी प्रतिष्ठान को प्रतिबंधित या विनियमित करने का अधिकार है जो मूल रूप से किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए भारत के बाहर रहने वाले व्यक्ति द्वारा आयोजित किया जाता है. भारत में किसी भी सामान या सेवाओं को निर्यात करने में सक्षम होने से पहले व्यक्ति को निम्नलिखित का पालन करना आवश्यक है:

आरबीआई द्वारा निर्धारित फॉर्म के अनुसार घोषित करना जिसमें माल के सही और सही विवरण शामिल हैं, माल का पूरा निर्यात मूल्य या वर्तमान बाजार स्थितियों पर विचार करने वाले निर्यातक द्वारा निर्धारित मूल्य.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्यात की जाने वाली सभी जानकारी को निर्यात करने के लिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि निर्यात की प्राप्ति निर्यातक द्वारा की गई है.

फेमा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि केवल अधिकृत व्यक्तियों को विदेशी मुद्रा या विदेशी सुरक्षा में सौदा करने की अनुमति है. ऐसे अधिकृत व्यक्ति केवल अधिकृत डीलर, मुद्रा परिवर्तक, ऑफ-किनारे बैंकिंग इकाई या किसी अन्य व्यक्ति को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अधिकृत किया जा सकता है. विदेशी मुद्रा से निपटने वाला कोई अन्य व्यक्ति फेमा के तहत दंड के लिए उत्तरदायी होगा.

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